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इस संदर्भ मेंअंडर सात फुटबॉल टूर्नामेंट युवा शिखर सम्मेलन मैत्री शहर कॉनक्लेव
युवा राजनयिक मंच फिल्म महोत्सव जैसे कार्यकलापों का आयोजन किया जा रहा है
विदेशमंत्री सुषमा स्वराज के अनुसार ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान मंत्री आधिकारिक
तकनीकी और ट्रैक स्तर की पचास से अधिक बैठकें आयोजित की गर्इं उन्होंने कहा कि
ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए भारत का विषय बिल्डिंग रिस्पांसिव इनक्लूसिव एंड
कलेक्टिव सॉल्यूशंस ब्रिक्स है ब्रिक्स नेताओं ने चार सितंबर दो हज़ार सोलह को
हांगझाऊ में जी बीस शिखर सम्मेलन के बाद मुलाकात की नेताओं ने वैश्विक राजनीति
विचार विमर्श किया इसके अलावा नेताओं ने ब्रिक्स में आपसी व्यापार पर्यटन और यात्रा
संबंधों को मजबूत बनाने पर भी विचार किया साथ ही ब्रिक्स के नेताओं ने भारत की
ब्रिक्स की अध्यक्षता और कार्यान्वयन की अच्छी गति तथा भारत की अध्यक्षता में भारत
के शहरों व प्रांतों में आयोजनों के माध्यम से ब्रिक्स में लोगों के बीच आदान
प्रदान के सुदृढ़ीकरण सहित ब्रिक्स सहयोग एजेंडे के विस्तार की सराहना की सूचना
जातिगत भेदभाव की समाप्ति के प्रति लोगों में गंभीरता की कमी और दंड से बचे रहने का
चलन तथा राज्य की जवाबदेही की कमी इस प्रथा की समाप्ति के लिए संसद या कार्यपालिका
बाद महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाई गई बर्वे समिति को देखें उन्नीस सौ अड़तालीस
जिसकी सिफारिशों को केंद्र सरकार ने भी स्वीकार किया था और उसके बाद बनी मलकानी
समिति की रिपोर्ट को पलटें या इसी किस्म के अन्य नीतिगत हस्तक्षेपों या विधायी
कार्रवाइयों को देखें जिनमें केंद्र सरकार द्वारा उन्नीस सौ तिरानवे में तथा
बीसतेरह में बनाए कानूनों को शामिल कर सकते हैं यही समझ में आता है कि ऐसे कदमों की
कोई कमी नहीं रही है मगर कुल मिलाकर वहीं का वहीं कदमताल होता रहा है अगर हम उन्नीस
सौ तिरानवे में बने एम्प्लायमेंट आँफ मेन्युअल स्केवेंजर्स एंड कंस्ट्रक्शन आँफ डाइ
लैटरिन्स प्रोहिबिशन अधिनियम उन्नीस सौ तिरानवे को देखें तो पता चलता है कि इस
अधिनियम को महज अधिसूचित करने में चार साल लग गए जब उसे भारत सरकार के गजट में दर्ज
किया गया फिर कानून बनने के बाद इतने लंबे अरसे में न कभी किसी सरकारी अधिकारी और न
ही किसी कंपनी या फर्म को इसके लिए सजा दी गई कि उनके मातहत यह प्रथा क्यों
बेरोकटोक चल रही है
एक स्थानीय पत्रकार की मानें तो इस दौरान लगभग दस मंदिरों को आग के हवाले कर दिया
गया इस उपद्रव का कारण सिर्फ इतना सामने आया कि बांग्लादेश के एक हिंदू युवक ने
फेसबुक पर कुछ इस्लाम विरोधी लिख दिया था इससे बांग्लादेश के बहुसंख्यक समुदाय का
पारा इतना चढ़ गया कि मंदिरों और हिंदुओं को क्षति पहुंचा कर ही शांत हुआ यह सही है
कि किसी भी धर्म या मजहब के विरोध में कोई भी आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं होनी चाहिए
लेकिन अगर कोई ऐसा कर भी देता है तो उस पर मौजूदा कानून के हिसाब से कार्रवाई करने
के बजाय इस तरह धार्मिक स्थलों को नष्ट करना और उस समुदाय के लोगों पर हमले करना एक
लोकतांत्रिक देश में कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता सन उन्नीस सौ इकहत्तर में जब
पाकिस्तान से टूट कर एक अलग देश के रूप में बांग्लादेश का उदय हुआ तो उसने स्वयं को
पाकिस्तान से अलग राह पर चलते हुए एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया था संवैधानिक
रूप से वह धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में बना रहा है लेकिन वहां जनसंख्या में
मुसलिम समुदाय का आधिक्य था जिसे शायद धर्मनिरपेक्षता का यह बाना कभी पसंद नहीं आया
परिणामत उन्नीस सौ अट्ठासी में बांग्लादेश के सैन्य शासक एचएम इरशाद जब सत्तारूढ़
हुए तो उन्होंने धर्मनिरपेक्षता को धता बताते हुए संविधान संशोधन के जरिए इस्लाम को